सियासत के श्रीमंतों का सफाया
चुनावी नतीजों के बाद से यह सवाल उठने लगा है कि क्या वंशवादी राजनीति का अंत हो रहा है? सवाल मुनासिब है, इस चुनाव में मतदा»
चुनावी नतीजों के बाद से यह सवाल उठने लगा है कि क्या वंशवादी राजनीति का अंत हो रहा है? सवाल मुनासिब है, इस चुनाव में मतदा»
अंग्रेजी हुकूमत ने अवध इलाके पर अपना बर्चस्व कायम की। वह साल था 1856 का। अवध पर अंग्रेजी हुकूमत स्थापित होने के बाद अपने»
सुरक्षा परिषद के ढांचे में परिवर्तन की मांग कई वर्ष पहले उठी थी। अब यह जोर पकड़ रही है। संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख»
हर लेते हैं जीवन का तमस….. धार्मिक यात्राएं भी अपने आप में अनोखी और स्फूर्ती देने वाली होती है। मेरे कई सालों के»
मुस्लिम लीग की अनुपस्थिति संविधान सभा पर अंत तक छाई रही। इस तरह मानो संविधान सभा पर मुस्लिम लीग की प्रेत बाधा मंड»
इन आम चुनावों में नरेंद्र मोदी की विजय अनेक अर्थों में ऐतिहासिक है। यह विजय उन्हें अपने पिछले पांच वर्षों के शासन की नीत»
अपना संविधान बनाने की धुन में डूबे रहने के कारण क्या कांग्रेस नेतृत्व ने भारत विभाजन के खतरे को नहीं समझा? 1935 के ब्रिट»
भारतीय लोकतंत्र अपनी यात्रा के नए पड़ाव पर है। यह नयापन आशाप्रद है। इसमें सकारात्मकता है। लेकिन एक समूह ऐसा भी है»
मोदी सरकार ने अपनी नीतियों की दिशा को लेकर कोई समझौता नहीं किया। स्वयं नरेंद्र मोदी को यह भरोसा था कि उन्होंने दे»
गाँधीजी को याद करने की दो तारीखें तय हैं। 2 अक्टूबरः जन्म। 30 जनवरीः हत्या। सरकारी कैलेंडर में ये तारीखें और दिल्»
संविधान के लक्ष्य का प्रस्ताव ‘सभी सदस्यों ने खड़े होकर स्वीकार किया।’ यह 22 जनवरी, 1947 की ऐतिहासिक घटना है। उसी»
अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत के लिए ईरान से तेल खरीदना लगभग असंभव हो गया है। सऊदी अरब और इराक के बाद हम सबसे अ»
संविधान सभा के पांचवें दिन पंडित जवाहर लाल नेहरू ने लक्ष्य संबंधी प्रस्ताव रखा। वे चाहते थे कि उसे संविधान सभा बि»
लक्ष्य संबंधी प्रस्ताव पर संविधान सभा ने डा. भीमराव अंबेडकर का भाषण दत्तचित्त होकर सुना। इसकी पुष्टि अध्यक्ष डॉ.»
संविधान सभा में पंडित जवाहरलाल नेहरू के लक्ष्य संबंधी प्रस्ताव पर दूसरे चरण की बहस महीने भर बाद फिर से शुरू हुई।»
पाकिस्तान भी मानता है कि मदरसे आतंकवाद के प्रशिक्षण स्थल बन गए हैं। इसलिए उन्हें शिक्षा की मुख्य धारा में लाने की»
फारूक अब्दुल्ला व महबूबा मुती की ओर से दिये जा रहे अलगाववादी बयानों पर कांग्रेस की चुप्पी हैरान करने वाली है। इन»
सभी दल मुसलमानों का इस्तेमाल करते हैं। यह लड़ाई हिन्दू और मुसलमानों के बीच की नहीं है। हिन्दुओं के बीच की ही दो व»
कुंभ मूलत: साधु-संन्यासियों के इकट्ठा होने का अवसर था, लेकिन अंग्रेजों के समय कुंभ का स्वरूप मेले का बना दिया गया»