संजय काल

कांग्रेस के ऊंचे नेता शंकर दयाल सिंह की पुस्तक ‘इमरजेंसी क्या सच? क्या झूठ’ में एक अध्याय है, ‘सूर्योदय और सूर्यास्त’। क»

बैरिस्टर नरेन्द्र जीत सिंह संगठन को समर्पित जीवन

बैरिस्टर नरेन्द्र जीत सिंह को भला कौन नहीं जानता! वे और संघ एक-दूसरे के पर्याय थे। उन्होंने और उनके परिवार ने संगठन कीअन»

मोरेश्वर नीलकंठ (मोरोपंत) पिंगले संकलन के उत्कट अभिलाषी

संघ के वरिष्ठ प्रचारक मोरोपंत पिंगले को देखकर सब खिल उठते थे। उनके कार्यक्रम हास्य-प्रसंगों से भरपूर होते थे। लेकिन साथ»

लोकतान्त्रिक स्मृति में आपातकालीन इतिहास की युति-वियुति

समझि बुझि दृढ़ हो रहे बल तजि निर्बल होय। कहैं कबीर सो संत को पला न पकड़े कोय ॥’ अर्थात् सोच-विचार कर दृढ़ बना रहता»

सरदार पटेल अपनी योग्यता और निष्ठा के कारण 1947 में देश के स्वाभाविक प्रधानमंत्री होते

सरदार बल्लभ भाई पटेल वास्तव मे सरदार थे, लेकिन इतिहास में उन्हें जो स्थान मिलना चाहिए था, नही मिला। यह हमारे इतिहासकारों»