ग्रेट निकोबार परियोजना भारत की सबसे महत्वाकांक्षी अवसंरचना एवं सामरिक परियोजनाओं में से एक है। यह परियोजना अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के दक्षिणी भाग में स्थित ग्रेट निकोबार द्वीप को एक वैश्विक समुद्री, व्यापारिक और सामरिक केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इसमें एक अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, विद्युत संयंत्र तथा आधुनिक
टाउनशिप का निर्माण शामिल है।
ग्रेट निकोबार द्वीप विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक, मलक्का जलडमरूमध्य, के निकट स्थित है। यह स्थान भारत को हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। यहां विकसित होने वाला बंदरगाह भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल की निगरानी क्षमता को बढ़ाएगा तथा समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा। इससे भारत क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा सकेगा।
भारत का अधिकांश ट्रांसशिपमेंट कार्गो वर्तमान में विदेशी बंदरगाहों, विशेषकर सिंगापुर और कोलंबो, के माध्यम से संचालित होता है। ग्रेट निकोबार में बनने वाला अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल इस निर्भरता को कम करेगा और भारत को एक प्रमुख समुद्री व्यापार केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी, व्यापार लागत घटेगी और देश के निर्यात-आयात को नई गति मिलेगी।
इस परियोजना से अंडमान-निकोबार क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा। बंदरगाह, हवाई अड्डा और अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर उत्पन्न होंगे। पर्यटन, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्रों का भी विस्तार होगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।
भारत के लिए हिंद महासागर क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है। ग्रेट निकोबार परियोजना से भारत को समुद्री मार्गों की बेहतर निगरानी, आपदा प्रबंधन, मानवीय सहायता तथा रक्षा गतिविधियों के संचालन में सहायता मिलेगी। यह परियोजना भारत की “सागर” नीति को भी मजबूती प्रदान करती है।
यद्यपि परियोजना विकास और सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, फिर भी इसके पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर चिंताएँ व्यक्त की गई हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र प्रभावित हो सकता है तथा दुर्लभ जीव-जंतुओं और स्थानीय जनजातीय समुदायों पर प्रभाव पड़ सकता है। सरकार का दावा है कि परियोजना के लिए पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय और जनजातीय हितों की रक्षा हेतु विशेष प्रावधान किए गए हैं।
ग्रेट निकोबार परियोजना भारत के लिए केवल एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि आर्थिक प्रगति, राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री शक्ति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। यदि पर्यावरण संरक्षण और जनजातीय हितों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए इसका सफल क्रियान्वयन किया जाता है, तो यह परियोजना भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
