समर नहीं, समरसता
भारत की जीवन-व्यवस्था और चिंतन-प्रक्रिया में एक अद्भुत सामर्थ्य रही है। हजारों वर्ष प्राचीन हमारा देश आर्थिक, सामाजिक, र»
भारत की जीवन-व्यवस्था और चिंतन-प्रक्रिया में एक अद्भुत सामर्थ्य रही है। हजारों वर्ष प्राचीन हमारा देश आर्थिक, सामाजिक, र»
बदलते हुए समय में किसान को उसकी मेहनत का मूल्य मिलना चाहिए। किसान कड़ी मजदूरी करके जो भी पैदा करता है, उसकी मजबूरी का ला»
विपक्ष को किसानो की नहीं विचौलियों की चिंता है। वह बिचौलियों के लठैती कर रहा। विपक्ष ने मानसून सत्र के सातवें दिन राज्यस»
कौन न्यायी, दृढ़ है और कमजोरों के पक्ष में खड़ा होता है? कौन एक ईमानदार और काबिल प्रशासक है? कौन दुश्मनों का मुकाबला करता»
भारतीय सेना के पराक्रम और कुशलता के कारण पिछले दो सप्ताह में पैगांग सो क्षेत्र में पासा पलट गया है। पिछले महीने 29 और 30»
रविन्द्र शर्मा गुरूजी यहाँ संपूर्ण भारत की एकरूपता के साथ ही तीर्थों के भारत की एकरूपता के मुख्य कारण बताते है। उन्होंने»
खरीफ फसल के लिए उम्मीदें जगाती बरसात। भारत में समय पर अच्छी बरसात किसानों के लिए जहां कई सौगात लेकर आती हैं, वही अतिवृष्»
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि हमने कम्युनिस्ट चीन और पाकिस्तान से अपने संबंधो»
गांधी जी का लक्ष्य स्वराज्य था। स्वराज्य के लिए ही उन्होंने असहयोग और सविनय अवज्ञा जैसे आंदोलन चलाए। गांधी जी मानते थे क»
वर्ष 1946 की दो घटनाओं पर जितना ध्यान दिया जाना चाहिए उतना नहीं दिया गया है। पहली घटना नौसेना विद्रोह की है। इस विस्फोटक»
…रोम और यूनान आज अवनति के गढ्ढों में गिरे हुए हैं। फिर भी यूरोप के लोग उन्हीं की पुस्तकों से ज्ञान लेते हैं। वे सो»
न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ने 22 फरवरी, 1947 को खबर चलाई कि लार्ड माउंटबेटन भारत के वायसराय बनाए जा रहे हैं। महीने भर»
संविधान में बदलाव के बारे में डा. भीमराव अंबेडकर और पंडित जवाहरलाल नेहरू के विचार समान थे। अंबेडकर ने यह स्पष्ट रूप से क»
भारत शासन अधिनियम, 1935 से अंग्रेज जो चाहते थे उसे वे बहुत हद तक पा सके। कांग्रेस नेतृत्व को संविधान की अपनी अंधेरी गुफा»
संविधान सभा के पांचवे दिन पंडित जवाहर लाल नेहरू ने लक्ष्य संबंधी प्रस्ताव रखा। वे चाहते थे कि उसे संविधान सभा बिना बहस क»
भारत के संविधान की उद्देशिका का संबंध गर्भ-नाल की भांति उस लक्ष्य संबंधी प्रस्ताव से जुड़ा हुआ है जिसे पंडित जवाहरलाल नेह»
तत्कर्म यन्न बन्धाय सा विद्या या विमुक्तये। आयासायापरं कर्म विद्यऽन्या शिल्पनैपुणम्॥ अर्थात कर्म वही है जो बंधनो»
कला और सृजनात्मकता का मतलब प्रकृति-नया कुछ करना है, तो पीछे का सबकुछ छोड़ना पड़ता है कला- अनुभूति के अनुभव को आकार देना»
दूसरा विश्व युद्ध छिड़ने पर संविधान सभा के लिए पंडित नेहरू के अभियान को दो अनपेक्षित समर्थन मिले। पहला समर्थन उन्हें महात»