बैरिस्टर नरेन्द्र जीत सिंह संगठन को समर्पित जीवन
बैरिस्टर नरेन्द्र जीत सिंह को भला कौन नहीं जानता! वे और संघ एक-दूसरे के पर्याय थे। उन्होंने और उनके परिवार ने संगठन कीअन»
बैरिस्टर नरेन्द्र जीत सिंह को भला कौन नहीं जानता! वे और संघ एक-दूसरे के पर्याय थे। उन्होंने और उनके परिवार ने संगठन कीअन»
संघ के वरिष्ठ प्रचारक मोरोपंत पिंगले को देखकर सब खिल उठते थे। उनके कार्यक्रम हास्य-प्रसंगों से भरपूर होते थे। लेकिन साथ»
भाऊराव देवरस लखनऊ आए थे। पुराने कुछ सहयोगी उनसे बात कर रहे थे। अचानक वे बोल पड़े, ‘सुनो! डॉ. हेडगेवार की पीढ़ी के लोग एक-ए»
वंदे मातरम‘ के 150 साल पूरे होने के मौक़े पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में सोमवार को इस पर चर्चा की शुरु»
समझि बुझि दृढ़ हो रहे बल तजि निर्बल होय। कहैं कबीर सो संत को पला न पकड़े कोय ॥’ अर्थात् सोच-विचार कर दृढ़ बना रहता»
आज संविधान दिवस है.आज़ाद भारत का संविधान कैसा होगा और भारत के नागरिकों के अधिकार और कर्तव्य क्या होंगे , इसके लिए एक संव»
स्वतंत्र भारत के जन–जीवन पर लालकृष्ण आडवाणी का प्रभाव अत्यंत परिवर्तनकारी रहा है। वे अपनी जीवन यात्रा के 98 सोपान»
बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी.भाजपा को 89 सीटें मिली हैं. जदयू को 84 सीटें मिली हैं. और एन»
2025 का बिहार विधानसभा चुनाव ख़ास रहा. 1951 के बाद 75 वर्ष के इतिहास में बिहार में इतना ज्यादा मतदान नहीं हुआ था. इस बा»
समाज के दबे-कुचले और गरीब वर्गों को पैसों का प्रलोभन देकर या फिर डरा-धमका कर उनका धर्मांतरण कराने की षड्यंत्रकारी गतिविध»
तारीखों के ऐलान के साथ ही बिहार में विधानसभा चुनाव की सियासी जंग तेज होती जा रही है। चुनाव आयोग ने 6 अक्टूबर को इसकी घोष»
फौज और हुकूमत ने पाकिस्तान के आमजन को तरह-तरह से बरगला रखा है। वहां के शिक्षण संस्थान नई पीढ़ी के मन में भारत के प्रति जह»
इस विजयादशमी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के सौ स्वर्णिम साल पूरे हो गए। सौ साल पहले डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार न»
सरदार बल्लभ भाई पटेल वास्तव मे सरदार थे, लेकिन इतिहास में उन्हें जो स्थान मिलना चाहिए था, नही मिला। यह हमारे इतिहासकारों»
अटल बिहारी वाजपेयी ने एक शाम फोन कर के.आर. मल्कानी को बुलाया। उन्हांने पूछा था, क्या कर रहे हो? मल्कानी ने बताया, मैं सो»
बिहार चुनाव की तैयारी दिखने लगी है। पाला बदलने का दौर शुरू हो गया है। शीत, मीत और पीत के दौर में कौन, कब और किसका साथ छो»
इमरजेंसी के कुराज से दो–दो हाथ करने वाले लोकतंत्र के सेनानी कहलाए। कुछ तो ऐसे सेनानी रहे जो बिना लड़े वीरगति को प्र»
महात्मा गांधी ने परस्पर विपरीत प्रवृतियों के प्रतिभाशाली व्यक्तियों को स्वाधीनता संग्राम की संघर्ष धारा से जोड़ा। उनमें ए»
तालिबान के विदेश मंत्री का भारत में आगमन हो गया है .दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आज भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और अफग»