योग-संयोग : तब और अब – लाहिड़ी महाशय के बहाने योग का सफर
श्यामा चरण लाहिड़ी के जीवन में एक चमत्कार घटित हुआ। वे पहाड़ पर घूमने जाते थे। एक संन्यासी के आकर्षण ने उन्हें अपनी»
श्यामा चरण लाहिड़ी के जीवन में एक चमत्कार घटित हुआ। वे पहाड़ पर घूमने जाते थे। एक संन्यासी के आकर्षण ने उन्हें अपनी»
साक्षीगोपाल मंदिर में लोग लेकर आते हैं फरियाद # ओड़िशा के भुवनेशवर और पुरी रोड के बीच स्थित है साक्षीगोपाल का मंदिर आज»
1835 ई. में अंग्रेजों ने उत्तर-पश्चिमी प्रांत नामक एक नया प्रान्त बनाया, जिसमें मराठों से छीने गए आधुनिक मध्यप्रदेश के द»
25 जून 1975 ,जब लोकतंत्र का गला घोट दिया गया था | वाकया शुरू होता है ,1971 के चुनाव से सोशलिस्ट पार्टी के नेता रा»
गीता का विचार करते समय हम उस सत्य को ढूंढ़ते हैं, जो सनातन है। जिससे अन्य सभी सत्य पैदा होते हैं। इसी कारण वह परम-सत्य क»
भारत में किसान आंदोलनों की एक लंबी और सतत श्रृंखला है। किसान संघर्ष इतिहास में अपना अलग महत्तव रखते हैं। इन आंदोलनों ने»
महाराष्ट्र के पुणे स्थित राममनी आयंगर मेमोरियल योग इंस्टीट्यूट की स्थापना 19 जनवरी 1975 को की गई थी। यह पंजीकृत ट्रस्ट ह»
सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि 1937 के विधानसभा चुनाव में क्या कांग्रेस और मुस्लिम लीग का दृष्टिकोण भिन्न था? अग»
केंद्र सरकार ने आयकर विभाग के मुख्य आयुक्त, प्रधान आयुक्त सहित 12 वरिष्ठ अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे द»
भारत का खाकर पाकिस्तान का गीत गाने वाले अलगाववादी संगठनों पर केंद्र की कार्रवाई से नेकां व पीडीपी में जिस तरह की»
बहस समापन की ओर बढ़ रही थी। साथ साथ् सहमति के स्वर एक होने लगे थे। संविधान सभा के सदस्य लक्ष्य संबंधी प्रस्ताव का»
पहले सप्ताह में तीन खास बातें हुई। 10 दिसंबर, 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने एक प्रस्ताव पेश किया कि ‘यह सभा संविधान सभा कार्»
हम आज पहले ये जानने की कोशिश करते है की जिसे हम पत्रकारिता कहते है या जिसे हम मीडिया कहते है उसकी संस्कृति क्या ह»
संविधान सभा के रास्ते में अवरोधों के ऊंचे पहाड़ ही पहाड़ थे। कांग्रेस नेतृत्व को एक पगडंडी खोजनी पड़ी। तब ही संविधान सभा»
इलाहाबाद…. माफ कीजिएगा जुबान पर पुराना नाम आ ही जाता है… अब प्रयागराज हो गया शहर । इस शहर से कुछ एक 100 किलो»
जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्ष विदेश नीति से नरेंद्र मोदी की स्वतंत्र विदेश नीति कितनी अलग है, इसे अर्जेंटीना में»
नया दलाई भारत में भी पैदा हो सकता है कहकर दलाई लामा ने ऐसा तूफान खड़ा किया है जिससे चीन को मिर्ची लगनी तय है। इसस»
अध्यक्ष के आसन पर बैठने की बारी अब डॉ. राजेंद्र प्रसाद की थी। बधाई भाषण के क्रम में ‘भारत-कोकिला और बुलबुले हिन्द’ सरोजि»
देश में अब जो नई राजनैतिक परिस्थितियां उभरी हैं, उनमें मुसलमानों की सुरक्षा अलगाव में नहीं, समरसता में ही हो सकती»