संविधान की पहली प्रति, एक कलात्मक प्रस्तावना
जब नंदलाल बसु को हमारे संविधान की मूल प्रति के चित्रांकन का काम सौंपा गया था तो वह कोई सरकारी या अर्ध-सरकारी प्रस्ताव तो»
जब नंदलाल बसु को हमारे संविधान की मूल प्रति के चित्रांकन का काम सौंपा गया था तो वह कोई सरकारी या अर्ध-सरकारी प्रस्ताव तो»
आनंद कुमार भारत की संविधान सभा द्वारा संविधान का ऐसा मसौदा तैयार किया गया, जो कि उत्तर औपनिवेशिक समय में भारत के अन-औपनि»
भारत में ब्रिटिश शासन आने से पहले, खेती भारती जीवन-शैली का परंपरागत अभिन्न अंग थी। पशुपालन भी खेती किसानी का हिस्सा था।»
अभी तक हमने अर्जुन के विषाद योग को देखा। जब अर्जुन जैसी ऋजुता(सरल भाव) और हरिशरणता होती है, तो फिर विषाद का भी योग बनता»
सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन नए-नए वायरसों का जब तक कोई उपचार खोजा जाता है, वह बड़ी आबादी को अपनी चपेट में लेकर अपना रौद्र»
भारत में हरित क्रांन्ति की शुरुआत सन 1966-67 से हुई। इसकी शुरूआत का श्रेय नोबल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर नारमन बोरलॉग को»
वैसे 40 की उम्र ज्यादा नहीं होती। 40 की उम्र में ही अगर खुद के होने के सवाल के ज्यादतर उत्तर देने के करीब आप पहुंच जाते»
जनवरी 20, 1947 पं. जवाहरलाल नेहरू द्वारा विधान परिषद् में प्रस्तुत किए गए लक्ष्य संबंधी प्रस्ताव पर द्वितीय चरण की बहस क»
अर्जुन अहिंसा ही नहीं, सन्यास की भाषा भी बोलने लगा। वह कहता- इस रक्त लांक्षित क्षात्र-धर्म से सन्यास ही अच्छा है। परंतु»
कोराना वायरस दुनिया की नींद उड़ा चुका है। इसे जैविक हथियार के रूप में देखने वालों की कमी नहीं है। चीन के जिस वुहान शहर स»
कोरोना के कहर से हर कोई अपने घरों में हैं। वो लोग जो महानगरों की चमक दमक से प्रभावित होकर गांव छोड़ गए थे वे वापस आ रहे»
रामायण और महाभारत हमारे राष्ट्रीय ग्रंथ हैं। उसमें वर्णित व्यक्ति हमारे लोकजीवन में रच बस गए है। राम सीता धर्मराज द्रोपद»
श्री राम और लक्ष्मण की जनकपुर यात्रा ने अयोध्या और मिथिला की संस्कृतियों को एकाकार करने में महती भूमिका निभाई। दोनों राज»
‘अहो! अयोध्या’ ऐसी पुस्तक है जो आपको अयोध्या की यात्रा पर ले जाती है। इस यात्रा का हर पड़ाव नया कुछ जानने सम»
कोरोना वायरस का पहला केस चीन के वुहान शहर में बीते साल दिसंबर में सामने आया था | महज़ कुछ हफ़्तों में ही यह वायरस दुनिया»
भारत के भूगोल की देह ऐसी है, जिस पर कदम दर कदम ऋषियों ने महनीय हस्ताक्षर किए हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जैसा जननायक»
आज आजादी के 75 साल पूरा करने को दो साल बचे हैं। प्रकृति ने हमें सोचने का एक अवसर दिया है। हम सोचें उन मजदूरों की आंख में»
दुनिया भर में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 30 हज़ार के पार पहुंच चुकी है लेकिन अभी तक स्पष्ट तौर पर कोई विशेषज्ञ»
आजादी के बाद जमींदारी प्रथा का अंत हो चुका है। इसके बाद किसानों को जमीन का हक मिला। लेकिन यह हक काफी कुछ पन्नो पर ही है।»