कोविड मरीजों को ठीक करने में सफल हो रही, इएसआईसी कानपुर के आयुर्वेदाचार्य डा. अरविंद दुहन की टीम
डा. अरविंद दुहन सिर्फ नाम नही। यह पहचान है आयुर्वेद की। यह पहचान है युवा जोश की। यह पहचान है असाध्य बीमारियों से दो-दो ह»
डा. अरविंद दुहन सिर्फ नाम नही। यह पहचान है आयुर्वेद की। यह पहचान है युवा जोश की। यह पहचान है असाध्य बीमारियों से दो-दो ह»
साल 2005 के बाद पूरी दुनिया में “विकास” के बारे में बहस भी शुरू हो गई। 2008 के अमेरिका मे हुई मंदी का अमेरिका पर विशेष प»
भारत पहले रूस, फिर थोड़े समय चीन और 1990 से अमेरिका बनने की कोशिश मे लगा। पर ब्राजीलीकरण की ओर बढ़ा। ब्राजील की आबादी उत्त»
भारत में परिवार, शिक्षा व्यवस्था और कारीगरी की परंपरा के साथ ही युद्ध कौशल पर रवीन्द्र शर्मा गुरू जी की दृष्टि।»
जैसा कई बार कहा जा चुका है कि समाज मे पिछले 500 वर्षों मे जो बदलाव आया है उतना बदलाव पिछले 5000 वर्षों मे नही आया।उपनिवे»
रविन्द्र शर्मा गुरू जी आज हम सबके बीच नही है, लेकिन गुरूजी हमे भारत को समझने की दृष्टि देते हैं। इस बातचीत में गुरू जी क»
पिछले 70 वर्ष से चीन हमें सामरिक रूप से घेरने की कोशिश कर रहा है। पर हमने कभी गंभीरता से यह समझने की कोशिश नहीं की कि वह»
दिल्ली में 10 हजार बिस्तर क्षमता वाला सरदार पटेल कोविड देखभाल केंद्र एवं अस्पताल तैयार किया गया है। अस्पताल का श्रेय लेन»
आज से 45 वर्ष पूर्व 25-26 जून 1975 की दरम्यानी रात को कांग्रेस की तानाशाह इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाकर भारत के लोकतंत्र»
विज्ञान, कला, आध्यात्मिकता और सामाजिक अर्थशास्त्र भारत के गांवों की महत्वपूर्ण चीजें थी। आज जब कोरोना की महामारी से दुनि»
मानवाधिकार की दमदार आवाज़ अनंताकाश के मौन मे डूब गई। वे बेजुबानो की आवाज थे। खुद चरैवेति-चरैवेति ऋषि परंपरा के अनिकेत थे»
गृह मंत्रालय महीनों से चीनी जूम एप से लोगों को आगाह कर रहा है। यह एप विश्वसनीय नही हैं। इसके इस्तेमाल से आपका डाटा सुरक्»
भारत की स्वावलंबी परंपरा – श्री रामबहादुर राय»
हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय के विचार – पत्रकारिता के नए प्रश्न»
भारतीय राज्य व्यवस्था की पुनर्रचना का प्रश्न है बहुत पुराना। राज्य व्यवस्था चाहे भारत की हो या विश्व के किसी देश की हो,»
स्वतंत्र भारत में पहली बार खेती किसानी को केन्द्र में रखकर बजट बनने की शुरूआत हुई। अभी तक होता आया था कि बजट भाषण का 25»
नितिन गडकरी को ऐसे ही रोडकरी नहीं कहते। उन्हें विकास की पटरी पर योजनाओं का खाका खींचना बखूबी आता है। वह अपने कामकाज से इ»
चौथी पंचवर्षीय योजना ने सहकारी समितियों के पुनर्गठन को प्राथमिकता दी। इसका उद्देश्य था अल्पकालीन और मध्यकालीन सहकारी संर»