संविधान को जाने – 2
इसका एक परिणाम यह हुआ कि यूरोप में उभरी अनेक विचारधाओं की छाया स्वाधीनता आंदोलन पर वैचारिक रूप में पड़ी। साम्यवाद, नानारू»
इसका एक परिणाम यह हुआ कि यूरोप में उभरी अनेक विचारधाओं की छाया स्वाधीनता आंदोलन पर वैचारिक रूप में पड़ी। साम्यवाद, नानारू»
दीनबंधु एंड्रयूज न केवल एक भले अंग्रेज हैं तथा उन्होंने इस देश के लिए न केवल अपना सर्वस्व निछावर किया है बल्कि वे एक कला»
1931 में कांग्रेस का आंदोलन हुआ। आंदोलन में डा. जी स्वयं शामिल हुए। डा. जी के साथ संघ के प्रमुख कार्यकर्ता भी थे। लेकिन»
संविधान को जानें। मैं आपसे एक सवाल पूछूं, हम संविधान को क्यों जानें? सवाल कई तरह के होते हैं। कई बार सवाल इसलिए भी पूछे»
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बहादुर आदमी को कायर बनाता है? यह प्रश्न विचारणीय है। यह आप जो सोचते हैं वह भी सत्य हो सकता है। क»
मैं एक दूसरा पहलूू आपके सामने रखना चाहता हूं। बापू के जो रचनात्मक कार्य हैं, उनके बारे में फिर से बुनियादी विचार करने की»
मुनव्वर राना हो या फिर नसीरूद्दीन शाह या फिर आमिर खान, आखिर इनकी सोच कठमुल्लों से क्यों मिलती है। कई मौलानाओं से लेकर मु»
कोई भी मानव-संस्था ऐसी नहीं है जिसके अपने खतरे न हों। संस्था जितनी बड़ी होती है, उसके दुरूपयोग की संभावनाएं उतनी ही अधिक»
केन्दीय मंत्रिमंडल ने पाम आयल मिशन के कार्यान्वयन को मंजूरी दे दी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में»
अंग्रेजी शासन के दौरान आदिम जाति को तुच्छ दृष्टि से देखा जाता था। बाहरी लोग जबरदस्ती उनके पारंपरिक इलाकों को हथियाने लगे»
अपनी अद्वितीय प्राकृतिक संपदा, विपुल मानव संसाधन, अकूत सामाजिक-सांस्कृतिक पूंजी तथा समृद्ध विरासत के बावजूद भारत की गिनत»
हमारे यहां हर महीने का कोई न कोई देवता है और कोई न कोई ग्रंथ। माघ महीने में महाभारत के शांति और अनुशासन पर्व को पढ़ने की»
कहा जाता है कि ‘स्वतंत्रता’ का प्रस्ताव लॉर्ड बर्कनहेड का माकूल जवाब है। अगर यह बात संजीदगी से कही गई है, तो यह स्पष्ट ह»
आज शाम, भेंट किए गए आपके सुंदर मानपत्र के लिए, मैं आपका आभारी हूं। आपने कहा है, और ठीक ही कहा है कि इस सुंदर द्वीप में म»
सन् 1762 से सन् 1774 के बीच कई फकीर-संन्यासी विद्रोह इतिहास में दर्ज हैं। हिंदू संन्यासी और मुसलिम फकीर अक्सर एक स्थान स»
भारत के पास जो सामाजिक-सांस्कृतिक पूंजी है, उसकी जड़ें बहुत पुरानी हैं। यह सर्वविदित है कि विश्व में चीन और भारत की ही सभ»
देश के बहुत से लोगों के लिए गांधीजी का नाम राम बाण हो गया है। जब भी उन्हें देश के औद्योगिक ढांचे की कोई बुराई नजर आती है»
जंगल महल और मिदनापुर की संथाल, भूमिज और कुर्मी आदिवासी जातियों ने सन् 1760 में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह किया। अंग्रे»
हमें यह समझना होगा कि राष्ट्र केवल भौतिक साधनों से उन्नत नहीं हुआ करते। यदि ऐसा होता तो जापान कभी एक उन्नत राष्ट्र नहीं»