भारत में वामपंथी राजनीति का अवसान
वर्तमान भारतीय राजनीति में वामपंथ के लिए यह सबसे बुरा वक्त हैं, बुरा इसलिए क्योंकि वो राजनीतिक रूप से इस समय»
वर्तमान भारतीय राजनीति में वामपंथ के लिए यह सबसे बुरा वक्त हैं, बुरा इसलिए क्योंकि वो राजनीतिक रूप से इस समय»
अक्टूबर माह देश में विशेष रूप से गाँधी जयंती के लिए जाना जाता हैं. पिछले सौ वर्षों से भी अधिक समय से वे देश-»
दक्षिण सिनेमा की अभिनेत्री अमला पॉल ने एर्नाकुलम(केरल) के तिरुवैरानिकुलम महादेव मंदिर में प्रवेश करने से रोकने तथा»
1879 के आर्म्स एक्ट का विरोध करते हुए मद्रास कांग्रेस अधिवेशन के समय बिपिन चंद्र पाल ने कटाक्ष किया था, “मैं आश्वस»
भगवान बुद्ध ने कहा है, “हीनभाव ही श्रेष्ठता का दावेदार बनता है. जो श्रेष्ठ हैं, उन्हें तों अपने श्रेष्ठ होने का पत»
नवगठित उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल में दानिश आजाद अंसारी को शामिल किया गया. एक ऐसी पार्टी जिस पर मुस्लिम विरोधी होन»
सिद्धांतविहीन अवसरवादिता भारतीय राजनीति का कोढ़ हैं. इसी का एक पहलू राजनीतिक दल-बदल होता है. वास्तव में ये वैचारिक प्रतिब»
पुलित्ज़र एवं नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अमेरिकी उपन्यासकार टोनी मॉरिसन लिखती हैं, “निराश होने के लिए समय नहीं ह»
हीगेल के अनुसार, “चेतना सार्वभौमिक एवं अनश्वर है. प्रत्येक युग की ऐतिहासिक घटनाएं चेतना द्वारा प्रभावित होती हैं.&»
लोकनायक जयप्रकाश नारायण– “शायद आपको मालूम हो, श्री सुभाषचंद्र बोस ने शोनान (सिंगापुर) में एक अस्थाई स्वतंत»
जर्मन दार्शनिक शोपेनहावर ने इच्छाशक्ति द्वारा दुःखों से मुक्ति की कल्पना की है. वे चाहते हैं कि मानव, मानव का सहभोक्ता ह»
श्रीयुत मा.गोलवलकर (गुरूजी) ने सांप्रदायिकता के विविध स्वरुपों की विवेचना की है. इसमें हिंदू समाज की जीवनधारा के विरुद्ध»
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने एक बार कहा था, “पत्रकारिता कोई पेशा नहीं, यह जन सेवा का माध्यम है. लोकतांत»