बदलाव का हर पीढ़ी को अधिकार – रामबहादुर राय
संविधान के लक्ष्य का प्रस्ताव ‘सभी सदस्यों ने खड़े होकर स्वीकार किया।’ यह 22 जनवरी, 1947 की ऐतिहासिक घटना है। उसी से संव»
संविधान के लक्ष्य का प्रस्ताव ‘सभी सदस्यों ने खड़े होकर स्वीकार किया।’ यह 22 जनवरी, 1947 की ऐतिहासिक घटना है। उसी से संव»
पूरी दुनिया को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाते रहने वाले अमेरिका में इस बार लोकतंत्र का पहिया चुनाव की दलदल में अटक गया है। अमेरिक»
बिहार के लोगों ने राज्य का शासन चलाने के लिए लालू परिवार के प्रतिनिधि तेजस्वी यादव की जगह एक बार फिर नीतीश कुमार पर भरोस»
बहस समापन की ओर बढ़ रही थी। साथ साथ् सहमति के स्वर एक होने लगे थे। संविधान सभा के सदस्य लक्ष्य संबंधी प्रस्ताव का महत्व»
भारत सदियों से समुद्री मार्ग से परिचित रहा है। समुद्रमार्ग से जहां दूसरे देशों से व्यापार होता रहा वहीं नदी मार्ग से देश»
स्लिम लीग की अनुपस्थिति संविधान सभा पर अंत तक छाई रही। इस तरह मानो संविधान सभा पर मुस्लिम लीग की प्रेत बाधा मंडरा रही हो»
आनादिकाल से भारत भूमि एवं भारतीय सभ्यता परमात्मा की विशिष्ट कृपा की पात्र रही है। यह राष्ट्र अनंत प्राकृतिक एवं सभ्यतागत»
कोरोना ने प्रकृति के करीब जाने, उसके सानिध्य में जीने की एक ललक पैदा की। हालांकि ये ललक पैदा हुई मजबूरी में। लेकिन प्रकृ»
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने सोलिसिटर-जनरल के जरिये दिल्ली और एनसीआर इलाके में प्रदूषण पर अंकुश के लिए बस चंद दिनों»
हरियाणा के बल्लभगढ़ की घटना ने, जिसमें एक तरफ़ा प्यार मे एक युवा सरे-आम कॉलेज से निकल रही छात्रा का पहले अपहरण करना चाहता»
संविधान सभा में पंडित जवाहरलाल नेहरू के लक्ष्य संबंधी प्रस्ताव पर दूसरे चरण की बहस महीने भर बाद फिर से शुरू हुई। इस अवधि»
भारत और चीन के बीच कमांडर स्तर की सातवीं बैठक के बाद अब यह आशा क्षीण हो गई है कि दोनों देशों के बीच बातचीत से कोई रास्ता»
संविधान सभा में जयपाल सिंह अनुसूचित जनजाति का प्रतिनिधित्व कर रहे सदस्यों में सबसे बड़ा माना-जाना नाम था। पंडित जवाहरलाल»
कोरोना काल में टेक्नालाजी के किसी भी प्लेट फार्म से अगर आपको संवाद करना है तो दो शब्दों से बच नहीं सकते, म्युट और अनम्यु»
हिंद-प्रशांत क्षेत्र तेजी से अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का नया केंद्र बनता जा रहा है। इसका प्रमाण इस क्षेत्र की चार बड़ी»
भारतीय राजनीति में विपक्ष की भूमिका जिस तेजी से निरर्थक होती जा रही है, वह सबके लिए चिंता का विषय होना चाहिए। नरेंद्र मो»
महात्मा गांधी ने परस्पर विपरीत प्रवृतियों के प्रतिभाशाली व्यक्तियों को स्वाधीनता संग्राम की संघर्ष धारा से जोड़ा।»
कोदंड कठिन चढ़ाइ सिर जट जूट बाँधत सोह क्यों। मरकत सयल पर लरत दामिनि कोटि सों जुग भुजग ज्यों॥ कटि कसि निषंग बिसाल भुज गहि»
लक्ष्य संबंधी प्रस्ताव पर संविधान सभा ने डा. भीमराव अंबेडकर का भाषण दत्तचित्त होकर सुना। इसकी पुष्टि अध्यक्ष डा. राजेंद्»