पड़ताल

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष : संघर्ष और लोकतंत्र की गौरवशाली यात्रा

भारत में हिंदी पत्रकारिता का इतिहास केवल समाचारों के प्रकाशन का इतिहास नहीं है, बल्कि यह देश की सामाजिक, सांस्कृतिक और र»

संजय काल

कांग्रेस के ऊंचे नेता शंकर दयाल सिंह की पुस्तक ‘इमरजेंसी क्या सच? क्या झूठ’ में एक अध्याय है, ‘सूर्योदय और सूर्यास्त’। क»

बैरिस्टर नरेन्द्र जीत सिंह संगठन को समर्पित जीवन

बैरिस्टर नरेन्द्र जीत सिंह को भला कौन नहीं जानता! वे और संघ एक-दूसरे के पर्याय थे। उन्होंने और उनके परिवार ने संगठन कीअन»

मोरेश्वर नीलकंठ (मोरोपंत) पिंगले संकलन के उत्कट अभिलाषी

संघ के वरिष्ठ प्रचारक मोरोपंत पिंगले को देखकर सब खिल उठते थे। उनके कार्यक्रम हास्य-प्रसंगों से भरपूर होते थे। लेकिन साथ»

‘मैं इमरजेंसी के खिलाफ हूं’-राष्ट्रपति फख्ररूद्दीन अली अहमद

अटल बिहारी वाजपेयी ने एक शाम फोन कर के.आर. मल्कानी को बुलाया। उन्हांने पूछा था, क्या कर रहे हो? मल्कानी ने बताया, मैं सो»

इमरजेंसी कुराज में लोकसभा नेहरू बोले- जेपी स्वीकार, इंदिरा को धिक्कार और महेश्वर का उपकार

मान लीजिए कि गत जुलाई में प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू अचानक संसद भवन में पहुंच जाते हैं। वे महेश्वर नाथ कौल»

इमरजेंसी में लोकसभा के पहले दिन का प्रारंभिक विवरण: 21 जुलाई, 1975

‘ जिस प्रकार यह प्रस्ताव लाया जा रहा है उससे संसद का सरकार के समक्ष समर्पण ही प्रदर्शित होता है।’ कांग्रेस के जाने–»

50 साल: इमरजेंसी का सच चंद्रशेखर-इंदिरा गांधी: युधिष्ठिर-गांधारी

‘ हर रोज कोई न कोई यह बात दोहरा जाता है कि आखिर आपको क्यों जेल में रखा गया है, सरकार छोड़ती क्यों नहीं! मैं कोई उत्तर दे»