हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष : संघर्ष और लोकतंत्र की गौरवशाली यात्रा
भारत में हिंदी पत्रकारिता का इतिहास केवल समाचारों के प्रकाशन का इतिहास नहीं है, बल्कि यह देश की सामाजिक, सांस्कृतिक और र»
भारत में हिंदी पत्रकारिता का इतिहास केवल समाचारों के प्रकाशन का इतिहास नहीं है, बल्कि यह देश की सामाजिक, सांस्कृतिक और र»
आखिरकार इंदिरा गांधी की सरकार ने 4 जुलाई, 1975 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगा ही दिया। इस तारीख को अपनी डाय»
भूमिगत आंदोलन का महानायक कौन था? क्या यह हम जानते हैं? आज थोड़े से ही लोग हैं, जो इस प्रश्न का सही उत्तर दे सकते हैं। ऐस»
मोहभंग से विवेक भी जगता है। ऐसी ही मनोदशा में डा.शंकर दयाल सिंह अपनी पुस्तक में संजय गांधी की बाबत आत्मनिरीक्षण के भाव»
कांग्रेस के ऊंचे नेता शंकर दयाल सिंह की पुस्तक ‘इमरजेंसी क्या सच? क्या झूठ’ में एक अध्याय है, ‘सूर्योदय और सूर्यास्त’। क»
साहित्य और राजनीति के अमर नामों में एक शंकर दयाल सिंह है। वे इंदिरा गांधी की इमरजेंसी के साक्षी रहे। 1975 की इमरजेंसी मे»
बैरिस्टर नरेन्द्र जीत सिंह को भला कौन नहीं जानता! वे और संघ एक-दूसरे के पर्याय थे। उन्होंने और उनके परिवार ने संगठन कीअन»
संघ के वरिष्ठ प्रचारक मोरोपंत पिंगले को देखकर सब खिल उठते थे। उनके कार्यक्रम हास्य-प्रसंगों से भरपूर होते थे। लेकिन साथ»
भाऊराव देवरस लखनऊ आए थे। पुराने कुछ सहयोगी उनसे बात कर रहे थे। अचानक वे बोल पड़े, ‘सुनो! डॉ. हेडगेवार की पीढ़ी के लोग एक-ए»
अटल बिहारी वाजपेयी ने एक शाम फोन कर के.आर. मल्कानी को बुलाया। उन्हांने पूछा था, क्या कर रहे हो? मल्कानी ने बताया, मैं सो»
इमरजेंसी के कुराज से दो–दो हाथ करने वाले लोकतंत्र के सेनानी कहलाए। कुछ तो ऐसे सेनानी रहे जो बिना लड़े वीरगति को प्र»
मान लीजिए कि गत जुलाई में प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू अचानक संसद भवन में पहुंच जाते हैं। वे महेश्वर नाथ कौल»
‘ जिस प्रकार यह प्रस्ताव लाया जा रहा है उससे संसद का सरकार के समक्ष समर्पण ही प्रदर्शित होता है।’ कांग्रेस के जाने–»
जेपी-इंदिरा गांधी की भेंट से पहले एक और अत्यंत महत्वपूर्ण घटना हुई। वह इतिहास के पन्नों में खोजने पर भी नहीं मिलेगी, क्य»
अब यह कोई नहीं कह सकता कि शाहआयोग की कोई प्रति भारत में उपलब्ध नहीं है। इसका श्रेय एरा सेझियन को जाता है। उनके ही प्रयास»
यूरोप-अमेरिका में जो लोकतंत्र है, वह उनकी राजनीति और जीवन रीति में है। वहां के राजनीतिज्ञ भारत के लोकतंत्र को अपने चश्म»
‘ हर रोज कोई न कोई यह बात दोहरा जाता है कि आखिर आपको क्यों जेल में रखा गया है, सरकार छोड़ती क्यों नहीं! मैं कोई उत्तर दे»
इंदिरा गांधी ने अपने शासनकाल में दो बार देश में इमरजेंसी लगवाई। दूसरी इमरजेंसी 1975 की है। उस काल में एक तरफ प्रधानमंत्र»
जिस इंदिरा गांधी ने सिर्फ अपने पद के लिए इमरजेंसी लगाकर देश पर तानाशाही थोप दी, क्या उन्हें लोकतांत्रिक भी कहा जाना चाहि»