विकास और विरासत के बारह साल

प्रज्ञा संस्थान9 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अपने शासन के 12 वर्ष पूरे किए। वर्ष 2014 में शुरू हुई यह यात्रा आज भारतीय राजनीति, अर्थव्यवस्था और प्रशासन के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण दौरों में गिनी जा रही है। इन 12 वर्षों में सरकार ने गरीब कल्याण, बुनियादी ढांचे के विस्तार, डिजिटल क्रांति, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने को अपनी प्राथमिकता बनाया।

मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में गरीबों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए अनेक योजनाएँ शुरू कीं। जनधन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण(डीबीटी) के जरिए सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचाई गई, जिससे भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका कम हुई। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत करोड़ों परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराए गए। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालय निर्माण से खुले में शौच की समस्या को कम करने का प्रयास हुआ। वहीं, आयुष्मान भारत योजना ने गरीब परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की।

मोदी सरकार के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक डिजिटल इंडिया अभियान माना जाता है। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल भुगतान नेटवर्क वाले देशों में शामिल है। यूपीआई (यूपीआई) ने भुगतान प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाया है। सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण होने से नागरिकों को सुविधाएँ तेजी से मिलने लगी हैं। स्टार्टअप इंडिया और डिजिटल नवाचार को बढ़ावा मिलने से भारत विश्व के प्रमुख स्टार्टअप केंद्रों में शामिल हुआ है। सरकार के अनुसार देश में स्टार्टअप्स की संख्या लाखों तक पहुँच चुकी है, जिसने युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा किए हैं।

पिछले 12 वर्षों में सड़क, रेल, हवाई अड्डों और मेट्रो नेटवर्क के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया। देशभर में नए एक्सप्रेसवे बने, रेलवे का आधुनिकीकरण हुआ और वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों की शुरुआत हुई। कई नए हवाई अड्डे  और मेट्रो परियोजनाएँ शुरू की गईं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली, सड़क और जलापूर्ति जैसी मूलभूत सुविधाओं का विस्तार हुआ। जल जीवन मिशन के माध्यम से करोड़ों घरों तक नल से जल पहुँचाने का अभियान चलाया गया।

मोदी सरकार ने कई बड़े आर्थिक फैसले लिए। वस्तु एवं सेवा कर लागू कर देश में एकीकृत कर प्रणाली की शुरुआत की गई। दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता तथा उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई ) जैसी योजनाओं ने उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने का प्रयास किया। भारत आज विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है और वैश्विक आर्थिक मंचों पर उसकी भूमिका पहले से अधिक मजबूत हुई है।

महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई कदम उठाए गए। उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को गैस कनेक्शन मिले। स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दिया गया और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के प्रयास किए गए। तीन तलाक पर प्रतिबंध और संसद तथा विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने संबंधी कानून को भी सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में सरकार ने सख्त रुख अपनाया। सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर बल दिया गया। रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण और आधुनिक सैन्य उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा दिया गया। विदेश नीति के स्तर पर भारत की वैश्विक उपस्थिति मजबूत हुई है। जी-20 की अध्यक्षता, वैश्विक मंचों पर सक्रिय भागीदारी और विभिन्न देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी ने भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नई ऊँचाई दी है।

इन 12 वर्षों के दौरान सरकार ने कई बड़े और ऐतिहासिक निर्णय लिए। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना, नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होना तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (इडब्लूएस) के लिए आरक्षण जैसे फैसले राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण मील के पत्थर साबित हुए।

मोदी सरकार के 12 वर्ष भारतीय राजनीति और शासन व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण अध्याय रहे हैं। इस दौरान देश ने डिजिटल परिवर्तन, आधारभूत संरचना के विकास, कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार और वैश्विक स्तर पर बढ़ती प्रतिष्ठा का अनुभव किया है। समर्थकों के लिए यह कालखंड “नए भारत” के निर्माण का प्रतीक है, जबकि आलोचकों के लिए अभी भी कई चुनौतियाँ समाधान की प्रतीक्षा में हैं। फिर भी इतना निश्चित है कि पिछले 12 वर्षों ने भारत की विकास यात्रा को नई दिशा दी है और आने वाले वर्षों में इन नीतियों का प्रभाव देश के भविष्य को आकार देता रहेगा।

 

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