भारत और सेशेल्स के संबंध लंबे समय से मित्रता, विश्वास और पारस्परिक सहयोग पर आधारित रहे हैं। हिंद महासागर में स्थित सेशेल्स भले ही क्षेत्रफल और जनसंख्या के दृष्टिकोण से छोटा देश हो, लेकिन इसकी सामरिक स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत का “पड़ोसी पहले ” और हिंद महासागर नीति में सेशेल्स का विशेष स्थान है। दोनों देशों के संबंध केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, विकास सहयोग, शिक्षा, स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन जैसे अनेक क्षेत्रों तक फैले हुए हैं। हाल हीमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हिंद महासागर स्थित द्वीपीय देश सेशेल्स की तीन दिवसीय यात्रा समाप्त हो गयी है।
भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंध 1976 में सेशेल्स की स्वतंत्रता के बाद स्थापित हुए। तब से दोनों देशों ने समय-समय पर उच्चस्तरीय यात्राओं और समझौतों के माध्यम से अपने संबंधों को और मजबूत बनाया है। दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और शांतिपूर्ण सहयोग के समर्थक हैं।
रक्षा और समुद्री सुरक्षा दोनों देशों की साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। हिंद महासागर में समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने, तस्करी तथा अन्य समुद्री अपराधों से निपटने के लिए भारत सेशेल्स को निरंतर सहायता प्रदान करता
रहा है। भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल समय-समय पर संयुक्त अभ्यास, गश्त तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं। भारत ने सेशेल्स को गश्ती पोत, निगरानी विमान और रक्षा उपकरण भी उपलब्ध कराए हैं। इससे सेशेल्स की समुद्री सुरक्षा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
विकास सहयोग के क्षेत्र में भी भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत ने सेशेल्स में अनेक आधारभूत ढांचा परियोजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा तथा सूचना प्रौद्योगिकी के विकास में सहयोग दिया है। भारतीय अनुदान और रियायती ऋण के माध्यम से कई विकास परियोजनाएँ पूरी की गई हैं। इसके अलावा भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम के अंतर्गत सेशेल्स के अधिकारियों और विद्यार्थियों को भारत में प्रशिक्षण और शिक्षा के अवसर प्राप्त होते हैं।व्यापार और आर्थिक संबंधों में भी निरंतर प्रगति हो रही है। भारत सेशेल्स को दवाइयाँ, खाद्य सामग्री, मशीनरी और विभिन्न औद्योगिक उत्पाद निर्यात करता है, जबकि सेशेल्स से समुद्री उत्पाद तथा अन्य वस्तुओं का आयात किया जाता है। पर्यटन, ब्लू इकोनॉमी (नीली अर्थव्यवस्था) और मत्स्य क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाएँ भी तेजी से विकसित हो रही हैं।
जलवायु परिवर्तन दोनों देशों के लिए एक साझा चिंता का विषय है। समुद्र का बढ़ता जलस्तर और प्राकृतिक आपदाएँ विशेष रूप से छोटे द्वीपीय देशों के लिए गंभीर चुनौती हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सेशेल्स जैसे छोटे द्वीपीय विकासशील देशों की चिंताओं का समर्थन किया है। स्वच्छ ऊर्जा, सौर ऊर्जा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ रहा है।
सांस्कृतिक और जन-से-जन संबंध भी भारत-सेशेल्स मित्रता की मजबूत नींव हैं। सेशेल्स में भारतीय मूल का समुदाय लंबे समय से निवास करता है और वहाँ के सामाजिक एवं आर्थिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान देता है। भारतीय संस्कृति, योग, आयुर्वेद और बॉलीवुड की लोकप्रियता ने दोनों देशों के लोगों के बीच निकटता को और बढ़ाया है। भारत द्वारा छात्रवृत्तियाँ और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम भी इस संबंध को सशक्त बनाते हैं।
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में हिंद महासागर का सामरिक महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में भारत और सेशेल्स के बीच सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षित समुद्री मार्गों और सतत विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। दोनों देश मुक्त, सुरक्षित और समावेशी हिंद महासागर क्षेत्र की परिकल्पना को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं।
भारत और सेशेल्स के संबंध केवल दो देशों के बीच सहयोग का उदाहरण नहीं हैं, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और साझा समृद्धि की दिशा में एक मजबूत साझेदारी का प्रतीक हैं। भविष्य में रक्षा, ब्लू इकोनॉमी, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल तकनीक और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग के विस्तार से यह संबंध और अधिक मजबूत होने की संभावना है।
