नारी शक्ति वंदन अधिनियम

प्रज्ञा संस्थाननारी शक्ति वंदन अधिनियम के द्वारा एनडीए सरकार महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें आरक्षित कर आधी आबादी को उनका अधिकार दिलाना सुनिश्चित करना चाहती है . विपक्ष के विरोध के कारण इस पर ग्रहण लग गया है .इस विधेयक को पहले भी कई बार विरोध का सामना करना पड़ा था .लेकिन सितंबर 2023 में एनडीए सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर संसद में इस विधेयक को पास करवाया था. लेकिन लोकसभा में शुक्रवार को संविधान में 131वां संशोधन बिल वोटिंग के बाद गिर गया. यह बिल महिला आरक्षण क़ानून में संशोधन के लिए लाया गया था.इस विधेयक के माध्यम से लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाना था ताकि वर्तमान पुरुष प्रतिनिधियों की सीटें कम किये बिना महिलाओं को आरक्षण मिल सके

एनडीए इस विधेयक के पक्ष में दो तिहाई वोट हासिल नहीं कर सका . बिल के पक्ष में 298 वोट मिले जबकि इसके विरोध में 230 वोट मिले.फिलहाल दोनों संशोधन बिलों को आगे नहीं बढ़ाने का फ़ैसला किया गया है.संसद में महिलाओं को 33 फ़ीसदी आरक्षण देने वाले क़ानून में संशोधन और डीलिमिटेशन से जुड़े बिलों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच बहस के बाद सरकार ने जवाब दिया और फिर वोटिंग हुई. केंद्र सरकार के कानून मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक़, महिला आरक्षण अधिनियम 2023 गुरुवार (16 अप्रैल 2026) से लागू हो चुका था.

सरकार के प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) बिल 2026 में कहा गया है कि सीटों में आरक्षण डीलिमिटेशन के आधार पर लागू होगा. जबकि विरोध करने वालों का कहना था कि 33 फ़ीसदी आरक्षण लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों पर  ही देना चाहिए ना कि डीलिमिटेशन के आधार पर बढ़ाई गई सीटों पर.इंडी अलायंस के सभी सदस्यों ने महिला आरक्षण का विरोध किया. सरकार ने कहा, ”बिल का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण है. किसी-किसी संसदीय क्षेत्र में 39 लाख वोटर हैं. ऐसे में एक सांसद कैसे इतने लोगों पर ध्यान देगा.

जो सीटें बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं, वह ये ध्यान में रखें कि एससी-एसटी की सीटें बढ़ाने का भी विरोध कर रहे हैं. संविधान में परिसीमन का प्रावधान है.कुछ लोग उत्तर-दक्षिणका मुद्दा उठा रहे थे . वो कह रहे हैं कि दक्षिण भारत की सीटें कम हो जाएंगी. जितना संसद पर किसी और हिस्से का अधिकार है उतना ही दक्षिण भारत का.

कांग्रेस ने ओबीसी के साथ भी धोखा किया.चौधरी चरण सिंह और सीताराम केसरी को कांग्रेस ने काम पूरा नहीं करने दिया.1957 में ओबीसी के लिए आरक्षण के लिए काका कालेलकर कमेटी के सुझावों को ठंडे बस्ते में डाल दिया. 1980 में मंडल आयोग के सुझावों को ठंडे बस्ते में डाल दिया. वीपी. सिंह के समय मंडल आयोग की सिफारिशें लागू हुईं.

राजीव गांधी ने अपना लंबा भाषण मंडल आयोग के विरोध में दिया था . 1951 और 1971में जाति जनगणना का विरोध किया. अब कांग्रेस हार रही है तो उसे पिछड़ों की याद आ रही है. कांग्रेस ने एक भी पिछड़ा पीएम नहीं दिया. बीजेपी ने अति पिछड़ा वर्ग के नेता नरेंद्र मोदी को पीएम बनाया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में  बोलते हुए कहा ,जो इस बिल का विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी क़ीमत चुकानी पड़ेगी.उन्होंने कहा, अब देश की बहनों पर भरोसा करें, 33 फ़ीसदी महिलाओं को यहाँ आने दें और उन्हें निर्णय करने दें. देश की 50 फ़ीसदी आबादी को नीति-निर्माण में शामिल होना चाहिए. सबको साथ लेकर चलना है और मुझे संविधान ने यही सिखाया है. प्रधानमंत्री ने कहा,हम भ्रम में न रहें कि हम कुछ नारी शक्ति को दे रहे हैं, ये उनका हक़ है. हमने इसे कई दशकों से रोका हुआ है, आज उसका प्रायश्चित कर उस पाप से मुक्ति पाने का अवसर है

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