बिहार में भाजपा का सपना था कि उसका अपना मुख्यमंत्री हो.15 अप्रैल 2026 को बिहार और भाजपा के लिए यह ऐतिहासिक दिन बन गया .भाजपा के सम्राट चौधरी ने 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले लिया है.सम्राट चौधरी के साथ विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र यादव ने उपमुख्यमंत्री पद के रूप में शपथ लिया है .शपथ ग्रहण समारोह में नीतीश कुमार भी मौजूद थे .नीतीश कुमार ने हाल ही में राज्यसभा के सदस्य का शपथ लिया है.इस तरह से 21साल का नीतीश उग का समापन हुआ.
सम्राट चौधरी बिहार में कुशवाहा समाज से आते हैं जिनकी आबादी बिहार में यादवों के बाद सबसे ज्यादा है .सम्राट चौधरी भाजपा में नतो संघ से आये हैं और न ही एबीवीपी से .सम्राट चौधरी को बीजेपी को मुख्यमंत्री बनाना जरुरी था. सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने से बीजेपी लव-कुश समीकरण के साथ अति पिछड़ा वोट बैंक को एक साथ जोड़ना चाहती है. ये जेडीयू का भी कोर वोटर है .इसीलिए ऐसे नेता को आगे बढ़ाना जरुरी था जो इन वोटों को बीजेपी के पाले में ले आने में मददगार हो .सम्राट चौधरी बीजेपी में इससे पहले प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री रह चुके है .इसतरह से सम्राट चौधरी बीजेपी में सभी समीकरण में फिट बैठ रहे थे .
बिहार में सबसे ज्यादा आबादी यादवों की है . यादव बीजेपी को बहुत कम वोट देते है.बीजेपी ने बिहार में यादव नेता राम कृपाल यादव ,नित्यानंद राय और भूपेंद्र ययादव को आगे बढाने का कोशिस किया लेकिन बीजेपी को यादव वोट पाने
का कुछ खास सफलता नहीं मिली .इसलिए भी बीजेपी को सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाना पड़ा .जातिगत समीकरण में सम्राट चौधरी सही बैठते हैं .वैसे भी बिहार बीजेपी के लिए बहुत अहम् राज्य है .गठबंधन में सबसे बड़ा सदस्य होते हुए भी बिहार में बीजेपी इतने वर्षों तक अपना मुख्यमंत्री नहीं बना पाई थी . इस सफलता के पीछे वर्षों का मेहनत,रणनीति और राजनीतिक धैर्य का महत्वपूर्ण स्थान है .
लेकिन इस सफलता के पीछे बीजेपी के कुछ पुराने नेताओं का भी योगदान रहा है .इन नेताओं में कैलाशपति मिश्र हों ,के.एन गोविन्दाचार्य या फिर सुशिल मोदी हो,इन नेताओं के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है.जब बिहार में बीजेपी का जनाधार बहुत कम था तब भी कैलाशपति मिश्र ने जनसंघ के समय से ही बीजेपी को गांव –गांव तक पंहुचा दिया था .वही गोविंदाचार्य ने पार्टी को नई दिशा दी और पार्टी को पिछड़ों तक पहुँचाया .उत्तर भारत के जिन राज्यों में समाजवादी और जातिवादी राजनीति का असर रहा है.उसमें उत्तर प्रदेश और बिहार प्रमुख राज्य रहा है .उत्तर प्रदेश में पार्टी पहले से सत्ता में थी .लेकिन इतने सालों तक गठबंधन के तहत सत्ता में रहने के बावजूद पार्टी अपना मुख्यमंत्री नहीं बना पाई थी .
इसके बाद जब गठबंधन का दौर आया तो बीजेपी नीतीश कुमार के मजबूत सहयोगी के रूप में उभरी और धीरे-धीरे राज्य में अपना स्वतंत्र जनाधार तैयार करने लगा. अब जब बिहार में बीजेपी का अपना मुख्यमंत्री बन गया है तो बिहार के विकास को और नया रूप मिलेगा. नरेंद्र मोदी के सपने को पार्टी पूरा करेगी.
