प्रधानमंत्री की पाँच देशो की यात्रा और भारत यूएई आर्थिक साझेदारी समझौता


प्रज्ञा संस्थानभारत और संयुक्त अरब अमीरात के संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच केवल व्यापारिक ही नहीं, बल्कि सामरिक, ऊर्जा, निवेश, रक्षा और सांस्कृतिक स्तर पर भी गहरे रिश्ते विकसित हुए हैं। प्रधानमंत्री  की हालिया पाँच देशों की यात्रा ने भारत की सक्रिय विदेश नीति और वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती भूमिका को फिर से स्पष्ट किया है। इस यात्रा में यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली शामिल थे।

भारत और यूएई के संबंध सदियों पुराने हैं। अरब सागर के माध्यम से दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार और सांस्कृतिक संपर्क लंबे समय से रहे हैं। मसाले, कपड़े, मोती और अन्य वस्तुओं का व्यापार दोनों देशों को जोड़ता रहा है। आज यूएई भारत का एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार बन चुका है।वर्ष 2015 के बाद भारत-यूएई संबंधों में विशेष तेजी आई। प्रधानमंत्री की यूएई यात्रा और उसके बाद यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्राओं ने दोनों देशों की साझेदारी को नई ऊँचाई दी। दोनों देशों ने अपने रिश्तों को “व्यापक रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा दिया।

यूएई भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का व्यापार होता है। व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता लागू होने के बाद व्यापार और निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भारत ऊर्जा, पेट्रोलियम और गैस की जरूरतों के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है और यूएई इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।भारत और यूएई के बीच स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली तथा निवेश सहयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। दोनों देश इंफ्रास्ट्रक्चर, बंदरगाह, डिजिटल तकनीक और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए यूएई अत्यंत महत्वपूर्ण है। हाल ही में भारतीय स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व्स लिमिटेड और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के बीच समझौता हुआ, जिससे भारत की रणनीतिक तेल भंडारण क्षमता को मजबूती मिलेगी। यह समझौता वैश्विक तनाव और ऊर्जा संकट के दौर में भारत के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।यूएई भारत को कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। इसके अलावा हरित ऊर्जा, हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देश साथ काम कर रहे हैं।

यूएई में लगभग 35 लाख भारतीय रहते हैं, जो वहाँ का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है। भारतीय समुदाय यूएई की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध भी मजबूत हैं। यूएई में हिंदू मंदिर का निर्माण  और भारतीय त्योहारों का आयोजन इस बात का प्रमाण है कि दोनों देशों के संबंध केवल राजनीति तक सीमित नहीं हैं।

प्रधानमंत्री  की हालिया पाँच देशों की यात्रा भारत की बहुआयामी विदेश नीति का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इस यात्रा में उन्होंने यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा किया। इस दौरान व्यापार, रक्षा, तकनीक, निवेश और वैश्विक सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।यात्रा का पहला पड़ाव यूएई था। यहाँ ऊर्जा सुरक्षा, निवेश और सामरिक सहयोग पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने तकनीक, रक्षा और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे जैसे देशों के साथ भारत ने हरित तकनीक, जल प्रबंधन, रक्षा उत्पादन और डिजिटल नवाचार पर चर्चा की। ये देश तकनीकी रूप से अत्यंत विकसित हैं और भारत उनके साथ साझेदारी बढ़ाकर अपनी आर्थिक प्रगति को गति देना चाहता है।स्वीडन और नॉर्वे के साथ जलवायु परिवर्तन तथा स्वच्छ ऊर्जा पर सहयोग भी चर्चा का प्रमुख विषय रहा। वहीं नीदरलैंड के साथ बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स और कृषि तकनीक पर बातचीत हुई।

इटली यात्रा के दौरान भारत और यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक सहयोग को लेकर चर्चा हुई। भारत-यूरोप व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात भी चर्चा में रही। इस यात्रा ने भारत-इटली संबंधों को नई दिशा देने का प्रयास किया।

इस पाँच देशों की यात्रा से भारत को कई क्षेत्रों में लाभ मिलने की उम्मीद है। रिपोर्टों के अनुसार ऊर्जा, रक्षा, तकनीक और विनिर्माण क्षेत्र में बड़े निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं।इस यात्रा से भारत में लगभग पचास अरब डालर निवेश आने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया कि वह केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर एक प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में उभर रहा है। भारत की विदेश नीति अब “मल्टी-अलाइनमेंट” पर आधारित है, जहाँ वह विभिन्न देशों के साथ अपने हितों के अनुसार साझेदारी कर रहा है।

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