पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव के बीच इजराइल और तुर्किये के संबंध एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण दौर में पहुंच गए हैं। गाजा युद्ध और फिलिस्तीन के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच मतभेद लंबे समय से चले आ रहे हैं, लेकिन अब सीरिया इस टकराव का नया केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। हाल के घटनाक्रमों ने आशंका बढ़ा दी है कि यदि दोनों पक्षों ने संयम नहीं बरता तो पश्चिम एशिया में एक नया सैन्य और कूटनीतिक संकट पैदा हो सकता है।
तनाव को बढ़ाने वाली सबसे बड़ी घटना 18 अगस्त 2026 को सामने आई, जब इजराइल ने सीरिया के इदलिब प्रांत में स्थित अबू अल-दुहूर सैन्य हवाई अड्डे पर हवाई हमले किए। इजराइल का दावा था कि वहां तुर्किये की सैन्य तैनाती होने वाली थी और इससे उसकी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो सकता था। इजराइल के अनुसार सीरिया में तुर्किये का बढ़ता सैन्य प्रभाव क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है। हालांकि तुर्किये ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वहां उसके सैनिक मौजूद नहीं थे।
इस विवाद की जड़ें केवल सीरिया तक सीमित नहीं हैं। गाजा में इजराइली सैन्य कार्रवाई को लेकर तुर्किये राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन के नेतृत्व में लगातार इजराइल की आलोचना करता रहा है। अगस्त 2026 की शुरुआत में भी अंकारा ने
इजराइल के गाजा हमलों को लेकर कड़ा बयान जारी किया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कार्रवाई की मांग की थी।
अब टकराव कूटनीतिक स्तर पर भी पहुंच गया है। 21 अगस्त को तुर्किये ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस की मांग करने की घोषणा की। यह कदम गाजा की ओर जाने वाले ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला से जुड़े एक मामले में तुर्किये की कानूनी कार्रवाई के बाद उठाया गया। नेतन्याहू ने तुर्किये की इस कार्रवाई को खारिज करते हुए एर्दोगन पर तीखा हमला किया।
विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि सीरिया में दोनों देशों की गतिविधियां कहीं प्रत्यक्ष सैन्य टकराव में न बदल जाएं। सीरिया में बशर अल-असद सरकार के पतन के बाद तुर्किये का प्रभाव बढ़ा है, जबकि इजराइल अपनी सुरक्षा के लिए सीरिया में सैन्य गतिविधियां जारी रखे हुए है। इस कारण दोनों देशों के हित अब पहले की तुलना में अधिक सीधे टकरा रहे हैं।
हालांकि फिलहाल सीधे इजराइल-तुर्किये युद्ध की संभावना को नहीं माना जा सकता। रिपोर्टों के अनुसार इजराइल के कुछ सुरक्षा अधिकारियों ने भी चेतावनी दी है कि तुर्किये के साथ सार्वजनिक टकराव को बढ़ाना अनावश्यक क्षेत्रीय संकट पैदा कर सकता है। अमेरिका भी तनाव कम करने और इजराइल, तुर्किये तथा सीरिया के बीच टकराव रोकने के लिए संपर्क तंत्र बनाने की कोशिश कर रहा है।
इजराइल और तुर्किये के बीच मौजूदा घमासान केवल दो देशों का विवाद नहीं है, बल्कि यह सीरिया, गाजा और पूरे पश्चिम एशिया के बदलते शक्ति संतुलन से जुड़ा हुआ है। यदि दोनों देश सैन्य और राजनीतिक बयानबाजी को नियंत्रित नहीं करते, तो इसका असर सीरिया की स्थिरता, अमेरिकी कूटनीति और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ सकता है। ऐसे समय में संवाद, पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता ही उस स्थिति को रोक सकती है जिसमें एक सीमित विवाद बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल जाए।
