द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से जर्मनी की राजनीति में धुर-दक्षिणपंथी विचारधारा को हाशिये पर रखने की एक अघोषित सहमति रही है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह “फ़ायरवॉल” तेज़ी से कमज़ोर पड़ती दिख रही है। इसका सबसे स्पष्ट प्रमाण 6 सितंबर 2026 को पूर्वी राज्य साक्सोनी-अनहाल्ट में हुआ राज्य चुनाव है, जहाँ धुर-दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फ्यूर डॉयचलैंड ने लगभग 43.8 प्रतिशत वोट हासिल कर सत्तारूढ़ चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की मध्य-दक्षिणपंथी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन को महज़ 17.2 प्रतिशत पर पीछे छोड़ दिया , यानी लगभग ढाई गुना अंतर से जीत। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी के इतिहास में पहली बार है जब किसी धुर-दक्षिणपंथी दल ने किसी राज्य चुनाव में इतनी निर्णायक बढ़त हासिल की हो।
यह सिर्फ़ एक राज्य की घटना नहीं है। एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार अब राष्ट्रीय स्तर पर अल्टरनेटिव फ्यूर डॉयचलैंड 28 प्रतिशत समर्थन के साथ जर्मनी की सबसे लोकप्रिय पार्टी बन चुकी है, जो “फ़ायरवॉल” के 20 प्रतिशत से काफ़ी
आगे है। पूर्वी जर्मनी के अन्य राज्यों जैसे मेक्लेनबुर्ग-फोरपोमर्न और ब्रांडेनबुर्ग में भी पार्टी 30 से 37 प्रतिशत के बीच समर्थन जुटा रही है। पश्चिमी जर्मनी के राज्यों में भी, जहाँ पार्टी परंपरागत रूप से कमज़ोर रही है, अब यह 18-22 प्रतिशत तक पहुँच रही है, जो इसके प्रभाव-क्षेत्र के विस्तार का संकेत है। 2013 में यूरो-विरोधी समूह के रूप में स्थापित अल्टरनेटिव फ्यूर डॉयचलैंड ने समय के साथ अपना रुख़ आप्रवासन-विरोधी और राष्ट्रवादी दिशा में मोड़ लिया। पार्टी अब आप्रवासन पर सख़्त प्रतिबंध, यूक्रेन को दी जा रही सहायता समाप्त करने, और यहाँ तक कि जर्मनी के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने की संभावना जैसे एजेंडे पर चुनाव लड़ रही है।
साक्सोनी-अनहाल्ट के मतदाताओं के बीच किए गए एक सर्वेक्षण से पता चला कि अल्टरनेटिव फ्यूर डॉयचलैंड समर्थकों में से 91 प्रतिशत इस बात से सहमत थे कि उन्हें देश में बहुत अधिक विदेशी लोगों के रहने की चिंता है। 2024 में हुए एक कथित इस्लामी आतंकी हमले, जिसमें तीन लोगों की जान गई थी, ने इस बहस को और तीव्र कर दिया था। यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद जर्मनी विकास दर बढ़ाने में संघर्ष कर रहा है, जिसका सीधा असर चांसलर मैर्त्स की गठबंधन सरकार की लोकप्रियता पर पड़ा है।
पूर्वी जर्मनी के कई इलाक़ों में बर्लिन की केंद्र सरकार और परंपरागत दलों के प्रति गहरी नाराज़गी है, जिसका फ़ायदा अल्टरनेटिव फ्यूर डॉयचलैंड के साथ-साथ वामपंथी-लोकलुभावन पार्टी को भी मिल रहा है।मुख्यधारा के दल अब तक अल्टरनेटिव फ्यूर डॉयचलैंड के साथ गठबंधन से इनकार करते आए हैं, लेकिन साक्सोनी-अनहाल्ट में मिली भारी हार के बाद यह रणनीति चुनौती में है। पार्टी के सह-नेता टीनो क्रुपाला ने इसे मतदाताओं द्वारा “फ़ायरवॉल” को स्पष्ट रूप से नकारे जाने के रूप में पेश किया है।
अल्टरनेटिव फ्यूर डॉयचलैंड की बढ़त बिना विवाद के नहीं है। साक्सोनी-अनहाल्ट में राज्य की घरेलू खुफ़िया एजेंसी ने पार्टी की स्थानीय इकाई को पुष्ट रूप से “दक्षिणपंथी उग्रवादी संगठन” के रूप में वर्गीकृत किया है, हालाँकि पार्टी इस लेबल को राजनीति से प्रेरित बताकर ख़ारिज करती है। इसके जवाब में जर्मनी के कई शहरों में लोकतंत्र-समर्थक और दक्षिणपंथ-विरोधी विशाल प्रदर्शन भी हुए हैं, जिनमें कभी-कभी लाखों लोग शामिल हुए।
फ़िलहाल राष्ट्रीय स्तर पर मुख्यधारा के दलों ने अल्टरनेटिव फ्यूर डॉयचलैंड के साथ गठबंधन से इनकार बनाए रखा है, इसलिए पार्टी के लिए केंद्र सरकार में पहुँचना अभी दूर की बात लगती है। लेकिन साक्सोनी-अनहाल्ट जैसी जीतों के बाद यह सवाल गहराता जा रहा है कि क्या यह “फ़ायरवॉल” लंबे समय तक टिक पाएगी, ख़ासकर तब जब पार्टी अन्य दलों के साथ राज्य स्तर पर गठबंधन बना कर सत्ता में आने के रास्ते तलाश रही है। यूरोप के अन्य देशों में भी दक्षिणपंथी लोकलुभावन आंदोलनों के उभार को देखते हुए, जर्मनी की स्थिति महाद्वीप की व्यापक राजनीतिक दिशा का एक महत्वपूर्ण संकेतक बन गई है।
