खेड़ा के अमर्यादित बोल

 

किसी व्यक्ति के पिता के नाम का अशिष्ट सम्बोधन अमर्यादा की पराकाष्ठा है और अगर वह व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री हो तो फिर ऐसा मामला गंभीर होता है.  कुछ दिनों पहले ही कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रेस के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से छेड़-छाड़ की थी, जब वे अडानी-हिंडनबर्ग मामले को लेकर जेपीसी बनाने की मांग करते हुए प्रेस वार्ता कर रहे थे. तब पवन खेड़ा ने  तंज करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को नरेंद्र “गौतमदास” मोदी कह कर सम्बोधित किया. फिर क्या था, भाजपा के लोग इस बयान से आग बबूला हो गये और असम तथा उत्तर प्रदेश में पवन खेड़ा के इस बयान को लेकर एफ.आई.आर. दर्ज हो गए.
   चूकीं मामला प्रधानमंत्री से जुड़ा था इसलिए देश की नज़र में यह मुद्दा बन जाना लाज़मी है. अब जब गुरुवार को कांग्रेस के तमाम बड़े नेता अपनी पार्टी के महाधिवेशन में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली से छत्तीसगढ़ रवाना होने ही वाले थे, तभी पवन खेड़ा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. कांग्रेस के यह नेता नई दिल्ली हवाई अड्डे पर विमान पर बैठे ही थे कि असम पुलिस और दिल्ली पुलिस के जवानों ने पवन खेड़ा को विमान से उतार कर गिरफ्ततार कर लिया, जिसके बाद कांग्रेस पार्टी के 50 से अधिक नेता हवाई अड्डे पर ही धरने पर बैठ गए.
   मामला दिल्ली के द्वारका स्थित अदालत में पहुंचा जहाँ पुलिस ने पवन खेड़ा को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया. उधर दूसरी तरफ वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया, जहाँ से पवन खेड़ा को बड़ी राहत मिली. कोर्ट ने पवन खेड़ा को मंगलवार तक अंतरिम जमानत दे दी साथ ही उनके खिलाफ असम और उत्तर प्रदेश में दर्ज मुकदमों को दिल्ली भेजने का भी आदेश दिया. कोर्ट में खेड़ा का पक्ष रखते हुए सिंघवी ने बताया की पीएम मोदी का नाम गलत केवल ज़ुबान फिसलने के कारण लिया गया जिसके लिए पवन खेड़ा माफ़ी भी मांग चुके हैं.
 पवन खेड़ा को अपनी ही पार्टी के लोकप्रिय नेता सचिन पायलट की बात सुननी चाहिए थी जो कई बार बोल चुके हैं कि वह अपने राजनैतिक विरोधियों के लिए भी ऐसे ही शब्दों का इस्तेमाल करते हैं जो वह खुद के लिए भी सुन सकें. लेकिन संभवतः खेड़ा विवाद पैदा करने का मन बना चुके थे. अब विवाद दो पक्षों में विभाजित हो गया है. एक तरफ भाजपा इसे पीएम मोदी का अपमान बता कर पवन खेड़ा पर हुई कार्रवाई को पुलिस और कानून के दायरे का बता रही है, तो वहीँ दूसरे तरफ कांग्रेस इसे अपने छत्तीसगढ़ महाधिवेशन में भाजपा द्वारा रोड़ा बता रही है. हालांकि राजनीतिक संघर्ष से इतर यह अमर्यादित टिप्पणी से जुड़ा मामला है जिससे कांग्रेस नेता को बचना चाहिए था.
[टिप्पणीकार पत्रकारिता के विद्यार्थी है . उपरोक्त उनके निजी विचार हैं]

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