मोक्ष नगरी है अयोध्या – चंपत राय

चंपत राय

बंबई के एक कार्यकर्ता ने इंटरनेट खंगाला और बड़े प्राचीन ऐसे कई मानचित्र खोज लिए जो ब्रिटेन के लोगों ने तैयार किए थे। वेदकालीन भारत, उपनिषद-पुराणकालीन भारत, महाभारत कालीन भारत, ऐसे अलग-अलग काल के भारत के कई मानचित्र उस एटलस में थे। हमने सारे मानचित्र को एटलस से निकाले, हर एक मानचित्र में अयोध्या स्पष्ट लिखा हुआ है। जिस ब्रिटिश व्यक्ति ने उस मानचित्र को खोजा होगा उसने मानचित्र से अयोध्या हटाने की चेष्टा कोशिश नहीं की। इससे स्पष्ट होता है कि अयोध्या कितनी प्राचीन है। 

मैं ये भी सोचता हूं कि राम का जन्म अयोध्या में हुआ तो अयोध्या राम से प्राचीन, अयोध्या सरयू के तट पर स्थित है तो सरयू अयोध्या से भी प्राचीन। अयोध्या का वर्णन स्कंद पुराण में आता है। हमारे सामने सवाल है कि इस अयोध्या की स्थिति क्या है और अयोध्या का महत्व क्या है? ये जो स्कंद पुराण है इसमें एक अयोध्या महात्म्य है। उस अयोध्या महात्म्य में कुछ श्लोक हैं। अब आप जाइये अयोध्या और देखिए अयोध्या का लोकेशन। पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण और अन्य चार दिशाओं में कहां-कहां कौन-कौन स्थान है इसका उल्लेख आता है। आप चलिए देखिए उल्लेख के आधार पर उन स्थानों को कि  कौन स्थान कहां है। श्लोक से दिशा और स्थान तय करिए। एक अंतर पड़ता है– दूरी का। आज कल दूरी मीटर और किलोमीटर में तय होती है। हम लोग जब छोटे थे, किशोरावस्था में थे तो दूरियां गज और मील में तय होती थी। स्कंद पुराण के समय में धनुष से दूरी को मापा जाता था। पांच धनुष की दूरी, पंद्रह धनुष की दूरी! अब ये धनुष कितना बड़ा होता था यही अज्ञात है। लेकिन दूरी का महत्व कम है, स्थान का महत्व ज्यादा है।

दूसरा सवाल था अयोध्या का महत्व क्या है ? स्कंद पुराण के ऋषियों ने लिखा है कि हजारों गाय के दान करने से जो पुण्य मिलता है, अमुक-अमुक काम से जो पुण्य मिलता है वो राम जन्मभूमि के दर्शन करने से वहीं पुण्य मिलता है। स्कंद पुराण कहता है कि अयोध्या के दर्शन करने से पुनर्जन्म नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट के जज के सामने हमारे आन्ध्र प्रदेश के एक वकील नरसिम्हा साहब ने अयोध्या के महत्व को बताते हुए कहा कि यदि मोक्ष चाहते हो तो अयोध्या और अयोध्या में राम जन्मभूमि का दर्शन करिए। अयोध्या और राम का महत्व सारे संसार को पता चले अयोध्या पर्व इसका प्रयोगशाला है। 

(28 मार्च 2020 को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र नई दिल्ली के परिसर में अयोध्या पर्व के उद्घाटन अवसर पर दिए गए भाषण के अंश)

 

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